पास होने के लिए कितने अंक जरूरी? जानें बोर्ड, यूनिवर्सिटी और प्रतियोगी परीक्षाओं के नियम

हर साल परीक्षा के समय छात्रों और अभिभावकों के मन में एक ही सवाल रहता है – “पास होने के लिए कितने अंक जरूरी?” चाहे बात 10वीं-12वीं बोर्ड की हो, यूनिवर्सिटी एग्जाम की या फिर किसी प्रतियोगी परीक्षा की, पासिंग मार्क्स को लेकर भ्रम बना रहता है।

इस लेख में हम आसान भाषा में समझेंगे कि अलग-अलग परीक्षाओं में न्यूनतम कितने अंक चाहिए होते हैं और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

बोर्ड परीक्षाओं में पासिंग मार्क्स कितने होते हैं?

उत्तर प्रदेश बोर्ड (UP Board)

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा आयोजित हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में आमतौर पर प्रत्येक विषय में कम से कम 33% अंक लाना जरूरी होता है।

  • थ्योरी में अलग से 33%
  • प्रैक्टिकल में भी न्यूनतम अंक जरूरी
  • कुल मिलाकर भी 33% होना चाहिए

अगर किसी विषय में 100 अंक हैं, तो पास होने के लिए कम से कम 33 अंक जरूरी होंगे।

CBSE बोर्ड

Central Board of Secondary Education (CBSE) में भी सामान्यतः 33% अंक पासिंग के लिए अनिवार्य हैं।

  • थ्योरी और इंटरनल असेसमेंट मिलाकर 33%
  • कुछ मामलों में ग्रेस मार्क्स भी दिए जा सकते हैं

यूनिवर्सिटी एग्जाम में पास होने के नियम

अधिकांश भारतीय विश्वविद्यालयों में पासिंग मार्क्स का नियम इस प्रकार होता है:

कोर्स प्रकारन्यूनतम अंक
स्नातक (BA, BSc, BCom)33% – 40%
प्रोफेशनल कोर्स (B.Tech, B.Ed)40%
पोस्ट ग्रेजुएशन40% – 50%

कुछ विश्वविद्यालयों में सेमेस्टर सिस्टम के अनुसार CGPA 4.0 या उससे अधिक जरूरी होता है।

प्रतियोगी परीक्षाओं में पासिंग मार्क्स

प्रतियोगी परीक्षाओं में “पास” शब्द की जगह “कटऑफ” अधिक महत्वपूर्ण होता है।

उदाहरण के लिए:

  • सरकारी नौकरी परीक्षा – 35% से 45% (कैटेगरी के अनुसार अलग)
  • शिक्षक पात्रता परीक्षा – सामान्य वर्ग के लिए 60%, आरक्षित वर्ग के लिए 55%
  • बैंकिंग परीक्षा – सेक्शनल और ओवरऑल कटऑफ दोनों जरूरी

कटऑफ हर साल बदल सकता है, क्योंकि यह उम्मीदवारों की संख्या और पेपर की कठिनाई पर निर्भर करता है।

ग्रेस मार्क्स क्या होते हैं?

अगर कोई छात्र 1–2 अंक से फेल हो जाता है, तो कई बोर्ड “ग्रेस मार्क्स” देकर पास कर देते हैं।

लेकिन यह सुविधा हर साल और हर छात्र को नहीं मिलती। यह पूरी तरह बोर्ड के नियमों पर निर्भर करता है।

सप्लीमेंट्री (कम्पार्टमेंट) का विकल्प

अगर छात्र एक या दो विषय में फेल हो जाए, तो उसे सप्लीमेंट्री परीक्षा देने का मौका मिलता है।

  • सप्लीमेंट्री में पास होकर साल बचाया जा सकता है
  • अगली परीक्षा में न्यूनतम पासिंग मार्क्स लाना जरूरी होगा

पासिंग मार्क्स से जुड़े जरूरी सवाल

क्या कुल 33% होने से पास माने जाएंगे?

नहीं, कई बोर्ड में हर विषय में अलग-अलग 33% जरूरी होता है।

क्या प्रैक्टिकल में फेल होने पर पास माना जाएगा?

नहीं, थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों में न्यूनतम अंक जरूरी होते हैं।

क्या अलग-अलग बोर्ड में नियम अलग हो सकते हैं?

हाँ, हर बोर्ड या यूनिवर्सिटी के अपने नियम होते हैं।

छात्रों के लिए जरूरी सलाह

  • केवल पासिंग मार्क्स का लक्ष्य न रखें, बेहतर प्रतिशत लाने की कोशिश करें
  • इंटरनल असेसमेंट को हल्के में न लें
  • टाइम मैनेजमेंट और नियमित रिवीजन पर ध्यान दें
  • सिलेबस पूरा कवर करें

निष्कर्ष

अधिकांश बोर्ड परीक्षाओं में 33% अंक पास होने के लिए जरूरी होते हैं, जबकि प्रोफेशनल और प्रतियोगी परीक्षाओं में यह प्रतिशत अधिक हो सकता है।

छात्रों को चाहिए कि वे केवल न्यूनतम अंक पर फोकस न करें, बल्कि अच्छे प्रतिशत के लिए तैयारी करें, ताकि आगे एडमिशन और करियर में फायदा मिल सके।


डिस्क्लेमर:

यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। पासिंग मार्क्स से संबंधित सटीक जानकारी के लिए संबंधित बोर्ड या विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट अवश्य देखें।

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